ग्रामीण समाज में ग्राम पंचायत की भूमिका

Authors

  • Ayodhya Singh M.Phil. in Sociology Author
  • Dr. Mahesh Shukla Retired Professor, Department of Sociology, Government Thakur Ranmat Singh Autonomous College, Rewa (M.P.) Author

DOI:

https://doi.org/10.64675/yfxm3859

Keywords:

ग्राम पंचायत, ग्रामीण समाज, ग्राम सभा, पंचायतीराज, जनसहभागिता, सामाजिक परिवर्तन, रीवा जनपद ।

Abstract

प्रस्तुत शोध पत्र में मध्यप्रदेश के रीवा जनपद के ग्रामीण समाज में ग्राम पंचायत की भूमिका का प्राथमिक आँकड़ों के आधार पर समाजशास्त्रीय विश्लेषण किया गया है। 73वें संविधान संशोधन के पश्चात् ग्राम पंचायत ग्रामीण स्वशासन एवं विकास की आधारभूत संस्था बन गई है, किन्तु उसकी वास्तविक भूमिका ग्रामीण सामाजिक संरचना, जनसहभागिता एवं प्रशासनिक क्षमता से प्रभावित होती है। अध्ययन हेतु वर्तमान रीवा जिले की छः जनपद पंचायतों से दो-दो ग्राम पंचायतों तथा प्रत्येक ग्राम पंचायत से दस-दस उत्तरदाताओं का चयन कर कुल 120 उत्तरदाताओं से साक्षात्कार अनुसूची के माध्यम से तथ्य संकलित किए गए। विश्लेषण से ज्ञात हुआ कि जन्म-मृत्यु पंजीयन, सड़क एवं नाली निर्माण, स्वच्छता तथा पेयजल जैसे नागरिक सेवा एवं अधोसंरचना संबंधी कार्यों में ग्राम पंचायत की भूमिका अपेक्षाकृत प्रभावी है, जबकि हितग्राहियों के चयन, विद्यालयों एवं आंगनवाड़ी की निगरानी तथा सामाजिक कुरीतियों के उन्मूलन में उसकी भूमिका कमजोर है। ग्राम सभा की बैठकों में केवल 21.67 प्रतिशत उत्तरदाता नियमित रूप से भाग लेते हैं तथा महिलाओं की सहभागिता पुरुषों की तुलना में सार्थक रूप से कम पाई गई (x² = 9.17, p < 0.05)। 73.33 प्रतिशत उत्तरदाता मानते हैं कि ग्राम पंचायत ने गाँव के जीवन को बेहतर बनाया है, किन्तु केवल 15.00 प्रतिशत उसके कार्यों में पूर्ण पारदर्शिता मानते हैं। शोध पत्र के अंत में ग्राम सभा के सशक्तिकरण, पारदर्शिता, महिला सहभागिता एवं क्षमता निर्माण से संबंधित सुझाव प्रस्तुत किए गए हैं।

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Published

2026-09-16