ग्रामीण विकास में जनसंचार माध्यमों की भूमिका-एक समाजशास्त्रीय अध्ययन (सीधी जिले के कुसमी तहसील के विशेष संदर्भ में)
DOI:
https://doi.org/10.64675/shodhbodh.v4.i3.012Keywords:
ग्रामीण विकास, जनसंचार माध्यम, कुसमी तहसील, सीधी जिला, ग्रामीण महिलाएँ, सूचना-पहुँच, पंचायती राज, विकास-सम्प्रेषण।Abstract
प्रस्तुत शोध पत्र मध्य प्रदेश के सीधी जिले की कुसमी तहसील में ग्रामीण विकास की प्रक्रिया में जनसंचार माध्यमों की भूमिका का समाजशास्त्रीय विश्लेषण प्रस्तुत करता है। अध्ययन प्राथमिक तथा द्वितीयक, दोनों प्रकार के स्रोतों पर आधारित है। प्राथमिक समंकों का संकलन कुसमी तहसील से स्तरीकृत यादृच्छिक प्रतिचयन पद्धति के माध्यम से चयनित 100 ग्रामीण महिलाओं से संरचित साक्षात्कार-अनुसूची के माध्यम से किया गया, जबकि द्वितीयक समंक जनगणना, जिला सांख्यिकी पुस्तिका तथा सम्बद्ध शोध-साहित्य से प्राप्त किए गए। अध्ययन से यह स्पष्ट हुआ कि मोबाइल फोन (82 प्रतिशत) तथा दूरदर्शन (50 प्रतिशत) कुसमी तहसील में सर्वाधिक व्यापक जनसंचार साधन हैं, तथा जनसंचार माध्यम (42 प्रतिशत) ग्रामीण विकास योजनाओं की जानकारी का सर्वाधिक सामान्य स्रोत बनकर उभरे हैं, जो सरकारी कर्मचारियों (25 प्रतिशत) तथा पारिवारिक/सामाजिक स्रोतों (20 प्रतिशत) से भी आगे हैं। माध्यम-उपयोग स्तर तथा ग्रामीण विकास योजनाओं की जागरूकता के मध्य सांख्यिकीय रूप से सार्थक सकारात्मक सम्बन्ध भी पाया गया। अध्ययन के निष्कर्ष यह रेखांकित करते हैं कि जनसंचार माध्यम कुसमी जैसी दुर्गम, जनजातीय-बाहुल्य तहसील में ग्रामीण विकास की सूचनात्मक बुनियाद को सुदृढ़ करने में एक महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं, यद्यपि अवसंरचनात्मक तथा सामाजिक-सांस्कृतिक बाधाएँ अभी भी विद्यमान हैं।
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