बघेलखण्ड के प्रमुख धार्मिक पर्यटन स्थलों का ऐतिहासिक अध्ययन
DOI:
https://doi.org/10.64675/shodhbodh.v4.i1.34Keywords:
बघेलखण्ड, धार्मिक पर्यटन, चित्रकूट, अमरकंटक, नर्मदा उद्गम, मैहर शारदा देवी, देवतालाब शिव मंदिर, बांधवगढ़, रीवा रियासत, ऐतिहासिक अध्ययन, विंध्य क्षेत्र, शक्तिपीठ ।Abstract
बघेलखण्ड मध्य भारत का एक ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं भौगोलिक दृष्टि से समृद्ध क्षेत्र है, जो वर्तमान मध्य प्रदेश के रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, अनूपपुर, उमरिया तथा शहडोल जिलों के साथ-साथ उत्तर प्रदेश एवं छत्तीसगढ़ के कुछ सीमावर्ती भागों में विस्तृत है। विंध्य पर्वत श्रेणी की गोद में बसा यह प्रदेश प्राचीन काल से ही धार्मिक आस्था, तीर्थाटन और सांस्कृतिक चेतना का केन्द्र रहा है। प्रस्तुत शोध पत्र में बघेलखण्ड के प्रमुख धार्मिक पर्यटन स्थलों, विशेष रूप से चित्रकूट, अमरकंटक, मैहर की शारदा देवी मंदिर, रीवा जिले का देवतालाब शिव मंदिर तथा बांधवगढ़ के धार्मिक-पुरातात्विक अवशेषों का ऐतिहासिक दृष्टिकोण से गहन विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है। यह अध्ययन ऐतिहासिक ग्रन्थों, रीवा राज्य के गजेटियरों, पुरातात्विक सर्वेक्षण प्रतिवेदनों तथा समकालीन शोध साहित्य पर आधारित है और इसमें ऐतिहासिक विवरणात्मक पद्धति का प्रयोग किया गया है। अध्ययन से यह स्पष्ट होता है कि बघेलखण्ड क्षेत्र न केवल धार्मिक आस्था का प्रमुख केन्द्र है, बल्कि इसके ऐतिहासिक स्थल क्षेत्रीय पर्यटन विकास, स्थानीय अर्थव्यवस्था के सशक्तिकरण तथा सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण की दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। शोध पत्र के अंत में इन स्थलों के समुचित संरक्षण, अवसंरचनात्मक विकास एवं व्यवस्थित प्रचार-प्रसार हेतु व्यावहारिक सुझाव भी प्रस्तुत किए गए हैं, जिससे बघेलखण्ड को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय धार्मिक पर्यटन मानचित्र पर समुचित स्थान प्राप्त हो सके।
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