शहडोल संभाग में पर्यटन विकास : चुनौतियाँ एवं संभावनाएँ

Authors

  • डॉ. लक्ष्मी केवट अतिथि विद्वान, भूगोल विभाग शासकीय पण्डित माधवराव सप्रे महाविद्यालय पेण्डा रोड, गौरेला, जिला-जी.पी.एम. (छ.ग.) Author
  • डॉ. लक्ष्मी केवट अतिथि विद्वान, भूगोल विभाग शासकीय पण्डित माधवराव सप्रे महाविद्यालय पेण्डा रोड, गौरेला, जिला-जी.पी.एम. (छ.ग.) Author

DOI:

https://doi.org/10.64675/shodhbodh.v4.i1.32

Keywords:

शहडोल संभाग, पर्यटन विकास, बांधवगढ़, अमरकंटक, बाणसागर बांध, विराट मंदिर, भौगोलिक अध्ययन, अवसंरचना, जनजातीय पर्यटन, संभावनाएँ, चुनौतियाँ।

Abstract

शहडोल संभाग, जो मध्य प्रदेश के शहडोल, उमरिया तथा अनूपपुर जिलों से मिलकर बना है, विंध्य तथा मैकल पर्वत श्रेणियों के मध्य स्थित एक भौगोलिक रूप से विशिष्ट तथा पर्यटन की दृष्टि से अत्यंत सम्भावनाशील क्षेत्र है। इस संभाग में बांधवगढ़ राष्ट्रीय उ‌द्यान, अमरकंटक, बाणसागर बांध, विराट मंदिर तथा क्षीरसागर जैसे धार्मिक, प्राकृतिक, पुरातात्विक एवं जलाशय-आधारित पर्यटन स्थल विद्यमान हैं, जो इसे मध्य प्रदेश के सबसे विविधतापूर्ण पर्यटन क्षेत्रों में सम्मिलित करते हैं। प्रस्तुत शोध पत्र में शहडोल संभाग के प्रमुख पर्यटन स्थलों का भौगोलिक विश्लेषण, पर्यटन विकास के समक्ष उपस्थित चुनौतियों, जैसे अवसंरचनात्मक कमियाँ, संपर्क-सुविधाओं का अभाव तथा असमन्वित प्रचार-प्रसार, तथा इस क्षेत्र में विद्यमान पर्यटन संभावनाओं, जैसे धार्मिक-सांस्कृतिक पर्यटन, वन्यजीव पर्यटन, जल-पर्यटन तथा जनजातीय पर्यटन, का विस्तृत अध्ययन प्रस्तुत किया गया है। अध्ययन द्वितीयक स्रोतों, जिला गजेटियरों, पर्यटन विभाग के प्रतिवेदनों तथा समसामयिक शोध सामग्री पर आधारित है। निष्कर्ष रूप में यह पाया गया कि शहडोल संभाग में पर्यटन विकास की अपार सम्भावनाएँ विद्यमान हैं, परन्तु अवसंरचनात्मक तथा नीतिगत सीमाओं के कारण यह क्षेत्र अपनी वास्तविक पर्यटकीय क्षमता का पूर्ण उपयोग नहीं कर पा रहा है, जिसके समाधान हेतु समन्वित भौगोलिक एवं विकासात्मक रणनीति की आवश्यकता है।

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Published

2026-03-18