बघेलखण्ड में जैव विविधता एवं संरक्षण: एक भौगोलिक अध्ययन
DOI:
https://doi.org/10.64675/shodhbodh.v4.i1.31Keywords:
बघेलखण्ड, जैव विविधता, संरक्षण, बांधवगढ़, संजय दुबरी, सोन घड़ियाल अभयारण्य, अचानकमार-अमरकंटक जैवमंडल, वन्यजीव, भौगोलिक अध्ययन, कोयला खनन, पारिस्थितिकी तंत्र।Abstract
बघेलखण्ड, जो वर्तमान मध्य प्रदेश के रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, शहडोल, अनूपपुर तथा उमरिया जिलों में विस्तृत है, विंध्य पर्वत श्रेणी तथा मैकल पहाड़ियों के मध्य स्थित एक भौगोलिक रूप से विशिष्ट एवं जैव-विविधता की दृष्टि से अत्यंत समृद्ध प्रदेश है। इस क्षेत्र में बांधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान, संजय दुबरी टाइगर रिजर्व, सोन घड़ियाल अभयारण्य, बगदरा अभयारण्य तथा अचानकमार-अमरकंटक जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र जैसे अनेक संरक्षित क्षेत्र स्थित हैं, जो बाघ, तेंदुआ, गौर, चीतल, नीलगाय, घड़ियाल तथा अनेक पक्षी एवं वानस्पतिक प्रजातियों के प्राकृतिक आवास हैं। प्रस्तुत शोध पत्र में बघेलखण्ड की भौगोलिक संरचना, वन्य वनस्पति एवं जीव-जगत, प्रमुख संरक्षित क्षेत्रों तथा वहाँ पाई जाने वाली जैव-विविधता का विस्तृत भौगोलिक अध्ययन प्रस्तुत किया गया है। साथ ही इस क्षेत्र की जैव-विविधता के समक्ष उपस्थित चुनौतियों, विशेष रूप से कोयला खनन, वन-क्षरण तथा अवैध शिकार से उत्पन्न खतरों, तथा इनके समाधान हेतु किए जा रहे संरक्षण प्रयासों का भी विश्लेषण किया गया है। अध्ययन द्वितीयक स्रोतों, वन विभाग के प्रतिवेदनों, वैज्ञानिक शोध लेखों तथा समसामयिक समाचार सामग्री पर आधारित है। निष्कर्ष रूप में यह पाया गया कि बघेलखण्ड की जैव-विविधता राष्ट्रीय महत्व की है, परन्तु विकासात्मक दबावों के कारण यह निरंतर संकट में है, जिसके संरक्षण हेतु समन्वित भौगोलिक एवं नीतिगत रणनीति की आवश्यकता है।
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