महिला आर्थिक सशक्तिकरण में सरकारी योजनाओं की प्रभावशीलताः एक समाजशास्त्रीय विश्लेषण
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https://doi.org/10.64675/shodhbodh.v2.i4.08Keywords:
महिला आर्थिक सशक्तिकरण, आर्थिक आत्मनिर्भरता, सरकारी योजनाएँ, वित्तीय समावेशन, महिला उद्यमिता, स्वयं सहायता समूह, कौशल विकास, स्वरोजगार, सामाजिक समानता, पितृसत्तात्मक व्यवस्था।Abstract
महिला आर्थिक सशक्तिकरण सामाजिक समानता, आत्मनिर्भरता तथा समावेशी विकास का महत्त्वपूर्ण आधार है। आर्थिक रूप से सक्षम महिला परिवार की आय, बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य, बचत, निवेश तथा अन्य महत्त्वपूर्ण निर्णयों में प्रभावी भूमिका निभाती है। प्रस्तुत शोध-पत्र में महिलाओं की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करने हेतु संचालित प्रमुख सरकारी योजनाओं की प्रभावशीलता का समाजशास्त्रीय विश्लेषण किया गया है। अध्ययन से स्पष्ट होता है कि जन-धन योजना, मुद्रा योजना, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन, कौशल विकास योजना, रोजगार सृजन कार्यक्रम तथा स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी पहलों ने महिलाओं को बैंकिंग सुविधा, ऋण, प्रशिक्षण, स्वरोजगार और उद्यमिता से जोड़ने में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया है। इन योजनाओं के फलस्वरूप अनेक महिलाओं की आय, आत्मविश्वास, सामाजिक प्रतिष्ठा और पारिवारिक निर्णयों में भागीदारी बढ़ी है। इसके बावजूद अशिक्षा, पितृसत्तात्मक व्यवस्था, योजनाओं की जानकारी का अभाव, जटिल आवेदन प्रक्रिया, बैंक ऋण प्राप्त करने में कठिनाई, तकनीकी ज्ञान की कमी, पारिवारिक असहयोग तथा बाजार तक सीमित पहुँच जैसी समस्याएँ योजनाओं की प्रभावशीलता को कम करती हैं। अतः महिला आर्थिक सशक्तिकरण के लिए आर्थिक सहायता के साथ शिक्षा, कौशल विकास, वित्तीय जागरूकता, सरल प्रशासनिक प्रक्रिया, बाजार सुविधा और निरंतर संस्थागत मार्गदर्शन आवश्यक है।
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