ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता में डिजिटल साक्षरता की भूमिका
DOI:
https://doi.org/10.64675/shodhbodh.v2.i1.13Keywords:
ग्रामीण महिलाएँ, आर्थिक आत्मनिर्भरता, डिजिटल साक्षरता, वित्तीय समावेशन, डिजिटल बैंकिंग, महिला उद्यमिता, स्वरोजगार, सामाजिक सशक्तिकरण।Abstract
ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता सामाजिक समानता और समावेशी ग्रामीण विकास का महत्त्वपूर्ण आधार है। डिजिटल साक्षरता महिलाओं को बैंकिंग सेवाओं, सरकारी योजनाओं, कौशल प्रशिक्षण, बाजार और स्वरोजगार के अवसरों से जोड़ने का प्रभावी माध्यम बन रही है। प्रस्तुत शोध-पत्र में ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता में डिजिटल साक्षरता की भूमिका का वर्णनात्मक एवं समाजशास्त्रीय विश्लेषण किया गया है। इसमें डिजिटल बैंकिंग, ऑनलाइन भुगतान, सरकारी सहायता, कृषि संबंधी जानकारी और डिजिटल विपणन की भूमिका पर विशेष ध्यान दिया गया है। डिजिटल साधनों के उपयोग से महिलाएँ बैंक खातों का संचालन, बचत एवं लेन-देन का प्रबंधन, उत्पादों का प्रचार और बाजार संबंधी जानकारी प्राप्त कर सकती हैं, जिससे उनकी आय, आत्मविश्वास और निर्णय क्षमता में वृद्धि होती है। इसके बावजूद शिक्षा की कमी, डिजिटल उपकरणों की अनुपलब्धता, कमजोर इंटरनेट संपर्क, तकनीकी ज्ञान का अभाव और ऑनलाइन धोखाधड़ी का भय प्रमुख बाधाएँ हैं। अतः ग्रामीण महिलाओं की स्थायी आर्थिक आत्मनिर्भरता के लिए नियमित प्रशिक्षण, सुरक्षित डिजिटल व्यवहार, सरल बैंकिंग व्यवस्था और निरंतर संस्थागत मार्गदर्शन आवश्यक है।
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