कृत्रिम बुद्धिमत्ता और नैतिकता : एक दार्शनिक विश्लेषण
DOI:
https://doi.org/10.64675/dsyzkh75Keywords:
कृत्रिम बुद्धिमत्ता, नैतिकता, दर्शनशास्त्र, मशीन लर्निंग, स्वायत्तता, गोपनीयता, जवाबदेही, मानवीय गरिमा, एल्गोरिदम पूर्वाग्रह, AI शासन ।Abstract
कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence-AI) आधुनिक युग की सर्वाधिक क्रांतिकारी तकनीकी उपलब्धि है। यह तकनीक मानव जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में गहरे परिवर्तन ला रही है चाहे वह चिकित्सा, शिक्षा, न्याय, अर्थव्यवस्था, सुरक्षा या कला का क्षेत्र हो। किन्तु इस तकनीकी क्रांति के साथ नैतिकता (Ethics) के अनेक जटिल प्रश्न भी उठ खड़े हुए हैं। प्रस्तुत शोध पत्र दार्शनिक दृष्टिकोण से कृत्रिम बुद्धिमत्ता और नैतिकता के अंतर्संबंधों का विश्लेषण करता है। इसमें यह विचार किया गया है कि क्या AI में स्वायत्त नैतिक निर्णय लेने की क्षमता है, मानव मूल्यों तथा यंत्र-आधारित तर्क के बीच कौन से द्वंद्व उत्पन्न होते हैं, और किस प्रकार एक न्यायसंगत एवं उत्तरदायी AI-नैतिकता की संरचना निर्मित की जा सकती है। शोध पत्र में पाश्चात्य एवं भारतीय दार्शनिक परम्पराओं के प्रकाश में AI नैतिकता के विविध आयामों - गोपनीयता, समानता, स्वायत्तता, जवाबदेही, और मानवीय गरिमा का विस्तृत विवेचन प्रस्तुत किया गया है। निष्कर्ष में यह प्रतिपादित किया गया है कि AI नैतिकता केवल तकनीकी समस्या नहीं, अपितु यह एक गहन दार्शनिक और सामाजिक चुनौती है जिसके समाधान के लिए व्यापक मानवीय संवाद, विधिक ढाँचे और दार्शनिक मार्गदर्शन अनिवार्य है।




