मन्नू भंडारी के उपन्यासों में नारी संघर्ष

Authors

  • डॉ. अनीता रानी Author

DOI:

https://doi.org/10.64675/zcv9b661

Keywords:

मन्नू भंडारी, नारी संघर्ष, आपका बंटी, महाभोज, एक इंच मुस्कान, स्वामी, स्त्री अस्मिता, मध्यवर्ग, पितृसत्ता, राजनीतिक चेतना

Abstract

मन्नू भंडारी ने हिंदी साहित्य की नई कहानी और उपन्यास परंपरा में स्त्री को पारंपरिक भावुकता या मूक सहनशीलता के पिंजरे से मुक्त कर एक सोचने, प्रश्न करने और निर्णय लेने वाली स्वतंत्र मानवीय सत्ता के रूप में प्रतिष्ठित किया है। उनका उपन्यास-संसार नारी संघर्ष को महज पुरुष-विरोध या पारिवारिक विद्रोह के सीमित दायरे में न रखकर उसे आत्मसम्मान, मध्यवर्गीय नैतिकता, भावनात्मक असुरक्षा और सामाजिक-राजनीतिक न्याय-बोध जैसे व्यापक संदर्भों से जोड़ता है। 'आपका बंटी' में जहाँ शकुन का संघर्ष वैवाहिक असंतोष, स्त्री-स्वतंत्रता और मातृत्व के बीच की जटिल कशमकश को बंटी के मानसिक संसार के बिखरने के माध्यम से दिखाता है, वहीं 'एक इंच मुस्कान' आधुनिक दाम्पत्य संबंधों के तनाव तथा भावनात्मक खोखलेपन को उजागर करता है। इसी तरह 'स्वामी' उपन्यास परंपरा, दाम्पत्य और स्त्री की आंतरिक आकांक्षाओं के द्वंद्व को स्वर देता है, तो 'महाभोज' में वे घरेलू विमर्श से ऊपर उठकर स्त्री को सामाजिक न्याय, जाति, सत्ता और जन-संघर्ष की वृहत्तर राजनीतिक चेतना के साथ खड़ा करती हैं। अंततः, मन्नू भंडारी के उपन्यासों में नारी संघर्ष केवल दुःख झेलने की गाथा नहीं है, बल्कि वह संबंधों की असमानता को पहचानकर सामाजिक व्यवस्था से टकराने और अपने स्वतंत्र अस्तित्व की अर्थवत्ता खोजने का एक अत्यंत जीवंत और वास्तविक दस्तावेज़ है।

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Published

2025-03-19