महिला सशक्तिकरण की सच्ची मिसाल मीराबाई

Authors

  • डॉ. अनीता रानी Author

DOI:

https://doi.org/10.64675/xzmcns57

Keywords:

मीराबाई, स्त्री-विमर्श, पितृसत्ता, महिला सशक्तिकरण, सामंतवाद, सार्वजनिक क्षेत्र, सात्विक विद्रोह, अस्मिता।

Abstract

प्रस्तुत शोध-पत्र मध्यकालीन भारत की सुप्रसिद्ध भक्त कवयित्री मीराबाई के जीवन और उनके काव्य का समकालीन स्त्री-विमर्श और महिला सशक्तिकरण के परिप्रेक्ष्य में एक विश्लेषणात्मक अध्ययन है। 16वीं शताब्दी का राजपूताना समाज कठोर पितृसत्तात्मक संरचनाओं, पर्दा-प्रथा, सती-प्रथा और सामंती बंधनों से जकड़ा हुआ था। ऐसे दमनकारी परिवेश में मीराबाई ने न केवल अपनी व्यक्तिगत और धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा की, बल्कि राज्यसत्ता और कुल-मर्यादा के संस्थागत दवाबों को चुनौती दी। यह शोध-पत्र स्थापित करता है कि मीराबाई का कृष्ण के प्रति आत्म-समर्पण रूढ़िवादी विवाह संस्था और पुरुष-वर्चस्व के विरुद्ध एक सात्विक विद्रोह और सत्याग्रह था। विभिन्न स्थापित सिद्धांतों के आधार पर मीराबाई को हिंदी साहित्य की पहली व्यावहारिक स्त्री-विमर्शकार के रूप में रेखांकित किया गया है।

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Published

2023-07-21