जल संसाधन संरक्षणः वर्तमान एवं भविष्य की आवश्यकता
DOI:
https://doi.org/10.64675/4j7b7a20Keywords:
जल संसाधन, जल संरक्षण, भूजल, वर्षा जल संचयन, जलवायु परिवर्तन, जल संकट, सतत विकास, मध्यप्रदेश।Abstract
जल जीवन का मूलाधार है। पृथ्वी पर उपलब्ध समस्त जल का मात्र 2.5 प्रतिशत ही मीठा जल है, जिसमें से केवल 0.013 प्रतिशत ही सतही जल के रूप में नदियों, झीलों एवं तालाबों में उपलब्ध है। बढ़ती जनसंख्या, औद्योगीकरण, कृषि विस्तार एवं जलवायु परिवर्तन के कारण जल संसाधनों पर दबाव निरंतर बढ़ता जा रहा है। भारत विश्व की लगभग 17 प्रतिशत जनसंख्या का वहन करता है, किन्तु उसके पास विश्व का केवल 4 प्रतिशत नवीकरणीय जल संसाधन ही उपलब्ध है। इस असंतुलन के कारण देश के अनेक भार्गों में जल संकट की स्थिति उत्पन्न हो रही है। प्रस्तुत शोध पत्र में जल संसाधनों की वर्तमान स्थिति, उनके अत्यधिक दोहन के कारणों तथा भविष्य की आवश्यकताओं का विश्लेषण किया गया है। साथ ही, जल संरक्षण की विभिन्न विधियों, सरकारी नीतियों एवं सामाजिक उत्तरदायित्व पर भी विचार किया गया है।




