शहडोल जिले में जैविक खेती उत्पादन की चुनौतियाँ एवं संभावनाएँ : एक भौगोलिक

Authors

  • डॉ. एस.एम. प्रजापति Author

DOI:

https://doi.org/10.64675/mckj7738

Keywords:

जैविक खेती, शहडोल जिला, भौगोलिक अध्ययन, जैविक प्रमाणीकरण, जनजातीय कृषि, मृदा स्वास्थ्य, जैव-विविधता, परम्परागत कृषि विकास योजना, कृषि उत्पादकता, सतत् कृषि।

Abstract

जैविक खेती कृषि की वह पद्धति है जिसमें रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों के स्थान पर प्राकृतिक एवं जैविक स्रोतों का उपयोग किया जाता है। वर्तमान युग में जब रासायनिक कृषि के दुष्प्रभाव स्पष्ट रूप से प्रकट हो रहे हैं, जैविक खेती न केवल मृदा स्वास्थ्य के संरक्षण में बल्कि कृषकों की आर्थिक स्थिरता और पर्यावरण संतुलन में भी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है। मध्य प्रदेश के शहडोल जिले में, जो अपनी जनजातीय विविधता, सघन वन क्षेत्र एवं सोन नदी के उपजाऊ मैदानों के लिए जाना जाता है, जैविक खेती की विशिष्ट संभावनाएँ विद्यमान हैं। प्रस्तुत शोध पत्र में शहडोल जिले की भौगोलिक परिस्थितियों के संदर्भ में जैविक खेती उत्पादन की वर्तमान स्थिति, इससे जुड़ी चुनौतियों एवं संभावनाओं का विश्लेषणात्मक अध्ययन किया गया है। शोध में प्राथमिक एवं द्वितीयक दोनों स्रोतों का उपयोग किया गया है। अध्ययन में पाया गया कि जिले में जैविक खेती का क्षेत्रफल धीरे-धीरे बढ़ रहा है परंतु प्रमाणीकरण, बाजार संपर्क, आदानों की उपलब्धता एवं वित्तीय सहायता जैसी चुनौतियाँ इसके समग्र विस्तार में बाधक हैं। यदि शासकीय योजनाओं का सुचारु क्रियान्वयन एवं कृषक जागरूकता बढ़ाई जाए तो शहडोल जिला प्रदेश का अग्रणी जैविक खेती केन्द्र बन सकता है।

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Published

2026-01-22