रीवा जिले में लघु एवं सीमांत कृषकों की आय एवं ऋण-भार-एक सर्वेक्षण अध्ययन
DOI:
https://doi.org/10.64675/zjz90c43Keywords:
लघु कृषक, सीमांत कृषक, ऋण-भार, कृषि आय, ऋण-आय अनुपात, रीवा जिला, अनौपचारिक ऋण, संस्थागत वित्त ।Abstract
प्रस्तुत शोध पत्र रीवा जिले में लघु एवं सीमांत कृषकों की आय के स्रोतों एवं ऋण-भार की स्थिति का विश्लेषण करता है। सर्वेक्षण अध्ययन पद्धति के अंतर्गत जिले की छह तहसीलों से कुल 300 कृषक परिवारों का साक्षात्कार किया गया। अध्ययन से ज्ञात हुआ कि लघु कृषकों की औसत वार्षिक आय ₹62,700 है जबकि उनका औसत ऋण-भार ₹64,900 तक पहुँच चुका है, जो ऋण-आय अनुपात 103% का संकेत देता है। सीमांत कृषकों की स्थिति और भी चिंताजनक है उनकी औसत आय मात्र ₹34,000 है जबकि ऋण-भार ₹54,600 है, जिससे ऋण-आय अनुपात 160% हो जाता है। कृषि क्षेत्रफल की सीमितता, सिंचाई सुविधाओं का अभाव, बाज़ार संपर्क की कमी तथा अनौपचारिक ऋण पर निर्भरता इन कृषकों के आर्थिक संकट के प्रमुख कारण हैं। अध्ययन संस्थागत ऋण की सुलभता, न्यूनतम समर्थन मूल्य का प्रभावी क्रियान्वयन एवं कृषि विविधीकरण को सशक्त बनाने की अनुशंसा करता है।




