जनजातियों में आहार एवं पोषण की प्रकृति-एक भौगोलिक अध्ययन (रीवा जिले के विशेष संदर्भ में)

Authors

  • डॉ. आर.के. शर्मा Author
  • शशिकांत कुमार पटेल Author

DOI:

https://doi.org/10.64675/93bd9p81

Keywords:

जनजातीय आहार, पोषण की प्रकृति, भौगोलिक अध्ययन, रीवा जिला, खाद्य-विविधता, कुपोषण, वन-आधारित आजीविका, खाद्य सुरक्षा, मातृ एवं बाल पोषण, जनजातीय स्वास्थ्य।

Abstract

प्रस्तुत शोध पत्र रीवा जिले की अनुसूचित जनजातियों में आहार एवं पोषण की प्रकृति का भौगोलिक दृष्टिकोण से विस्तृत विश्लेषण करता है। रीवा जिला मध्यप्रदेश के विन्ध्य पठार पर स्थित है, जहाँ कोल, गोंड, बैगा एवं खैरवार जैसी प्रमुख जनजातियाँ निवास करती हैं। इन जनजातियों का आहार-व्यवहार उनकी भौगोलिक परिस्थितियों, वन-संसाधनों, कृषि-स्वरूप, सांस्कृतिक मान्यताओं एवं सामाजिक-आर्थिक स्थिति के सम्मिलित प्रभाव से निर्मित होता है। शोध में प्राथमिक सर्वेक्षण के अंतर्गत जिले की पाँच जनजातीय-बहुल तहसीलों त्योंथर, सिरमौर, जावा, सेमरिया एवं मंगवां से 300 परिवारों का अध्ययन किया गया। ‌द्वितीयक स्रोतों के रूप में जनगणना 2011, NFHS-5 एवं NIN के पोषण मानकों का उपयोग किया गया। अध्ययन के निष्कर्ष स्पष्ट करते हैं कि जनजातीय परिवारों में आहार एकरसता, प्रोटीन एवं सूक्ष्म-पोषक तत्त्वों की कमी, मौसमी खाद्य असुरक्षा तथा पारंपरिक भोजन-व्यवहार में बाज़ार-प्रभाव से उत्पन्न असंतुलन जैसी समस्याएँ विद्यमान हैं। भौगोलिक अलगाव एवं परिवहन की कमी इन समस्याओं को और जटिल बनाती है। शोध के अंत में पोषण सुधार हेतु व्यावहारिक नीतिगत सुझाव प्रस्तावित किए गए हैं।

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Published

2026-04-23