नवप्रवर्तन का कृषि पर प्रभाव : जिला मऊगंज के संदर्भ में एक भौगोलिक अध्ययन

Authors

  • डॉ. ऊषा शर्मा अतिथि विद्वान, भूगोल विभाग शासकीय ठाकुर रणमत सिंह स्वशासी महाविद्यालय, रीवा Author
  • डॉ. बी.के. शर्मा सह-प्राध्यापक, भूगोल विभाग शासकीय ठाकुर रणमत सिंह स्वशासी महाविद्यालय, रीवा Author
  • प्रो. अनवर खान शोधार्थी, भूगोल विभाग शासकीय ठाकुर रणमत सिंह स्वशासी महाविद्यालय, रीवा Author

DOI:

https://doi.org/10.64675/fk8zkv44

Keywords:

कृषि नवप्रवर्तन, जिला मऊगंज, फसल उत्पादकता, यंत्रीकृत कृषि, जैव प्रौद्योगिकी, सिंचाई प्रबंधन, फसल विविधीकरण, भौगोलिक अध्ययन, मध्यप्रदेश कृषि, ग्रामीण विकास।

Abstract

जिला मऊगंज, मध्यप्रदेश का एक नवगठित जिला है, जो वर्ष 2023 में रीवा जिले से पृथक होकर अस्तित्व में आया। यह जिला मुख्यतः कृषि आधारित अर्थव्यवस्था पर निर्भर है, जहाँ की अधिकांश जनसंख्या कृषि कार्यों से अपनी आजीविका अर्जित करती है। वर्तमान युग में कृषि क्षेत्र में नवप्रवर्तन (Innovation) ने एक क्रांतिकारी परिवर्तन लाया है। उन्नत बीज प्रजातियों, आधुनिक यंत्रीकृत कृषि उपकरणों, जैव प्रौद्योगिकी, सिंचाई की नवीन विधियों तथा सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी के समन्वित उपयोग ने कृषि उत्पादकता को नए आयाम दिए हैं। प्रस्तुत शोध पत्र में जिला मऊगंज के संदर्भ में कृषि नवप्रवर्तन के विभिन्न आयामों, उनके प्रभावों एवं चुनौतियों का भौगोलिक दृष्टिकोण से विश्लेषण किया गया है। प्राथमिक एवं द्वितीयक दोनों प्रकार के आँकड़ों के आधार पर यह स्पष्ट हुआ है कि जिले में नवप्रवर्तन के कारण कृषि उत्पादन में वृद्धि, फसल विविधीकरण, किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार तथा भूमि उपयोग में परिवर्तन हुआ है। साथ ही, लघु एवं सीमांत कृषकों तक तकनीक की पहुँच, आर्थिक असमानता तथा पर्यावरणीय दबाव जैसी चुनौतियाँ भी विद्यमान हैं।

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Published

2026-05-21