करनाल मंडल की कृषि संरचना और संस्थागत कृषि ऋण की भूमिका: एक सामाजिक-आर्थिक अध्ययन
DOI:
https://doi.org/10.64675/af7bpn92Keywords:
करनाल मंडल, कृषि संरचना, संस्थागत कृषि ऋण, सामाजिक-आर्थिक अध्ययन, गेहूँ-धान प्रणाली, बासमती धान, कृषि यंत्रीकरण, पूँजीगत आवश्यकता।Abstract
यह शोध-पत्र करनाल मंडल अर्थात् करनाल, पानीपत, कैथल और कुरुक्षेत्र की कृषि संरचना तथा संस्थागत कृषि ऋण की प्रवृत्तियों का सामाजिक-आर्थिक परिप्रेक्ष्य में विश्लेषण करता है। अध्ययन का मूल उद्देश्य यह समझना है कि इस मंडल की कृषि व्यवस्था, सिंचाई-आधार, फसल-प्रधानता, बाजार-संबद्धता और औपचारिक वित्त तक पहुँच के बीच किस प्रकार का संबंध है। संशोधित संस्करण में शोध-पत्र के सभी अपेक्षित घटक—सार, प्रस्तावना, उद्देश्य, शोध-पद्धति, द्वितीयक आँकड़ों की सारणी, विश्लेषण, निष्कर्ष एवं सुझाव—समुचित रूप से जोड़े गए हैं। अध्ययन में उपलब्ध सरकारी एवं संस्थागत द्वितीयक स्रोतों, जैसे हरियाणा आर्थिक सर्वेक्षण, राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति हरियाणा दस्तावेज, भारत सरकार के कृषि ऋण सम्बन्धी प्रकाशन तथा एसबीआई के वार्षिक प्रतिवेदनों का उपयोग किया गया है। हालिया जिला-स्तरीय केसीसी कृषि ऋण आँकड़े यह संकेत देते हैं कि करनाल मंडल के भीतर भी औपचारिक कृषि ऋण की पहुँच समान नहीं है। करनाल में केसीसी खातों की संख्या में तीव्र वृद्धि दिखाई देती है, जबकि पानीपत में सीमित किन्तु सकारात्मक विस्तार दर्ज होता है; दूसरी ओर कैथल और कुरुक्षेत्र में खातों की वृद्धि के बावजूद औसत ऋण-गहराई में दबाव दिखाई देता है। अध्ययन इस निष्कर्ष पर पहुँचता है कि करनाल मंडल की कृषि संरचना, जो हरित क्रांति-उत्तर सिंचित, बाजारोन्मुख और उच्च इनपुट-आधारित कृषि पर आधारित है, उसे स्थायी रूप से समर्थन देने हेतु संस्थागत ऋण का विस्तार केवल मात्रा के आधार पर पर्याप्त नहीं है। समयबद्ध, फसल-विशिष्ट, छोटे एवं सीमांत किसानों के लिए अधिक लचीला, डिजिटल रूप से सुगम तथा निवेश-उन्मुख कृषि ऋण ढाँचा आवश्यक है।




