बघेलखण्ड के ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक पर्यटन स्थलों का ऐतिहासिक

Authors

  • डॉ सुधाकर प्रसाद दुबे Author

Keywords:

बघेलखण्ड, पुरातत्व, ऐतिहासिक पर्यटन, विंध्य क्षेत्र, भरहुत, बांधवगढ़, सांस्कृतिक विरासत, चित्रकूट, मैहर।

Abstract

बघेलखण्ड मध्यप्रदेश का एक ऐसा भौगोलिक एवं सांस्कृतिक क्षेत्र है जो अपनी समृद्ध ऐतिहासिक विरासत और पुरातात्विक संपदा के लिए सुविख्यात है। यह क्षेत्र रीवा, सतना, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, सीधी एवं सिंगरौली जिलों को समाहित करता है तथा विंध्य पर्वत श्रृंखला एवं सोन नदी की घाटियों के मध्य स्थित है। इस क्षेत्र की भूमि पर आदिमानव काल से लेकर आधुनिक युग तक अनेक सभ्यताओं, राजवंशों एवं संस्कृतियों ने अपनी छाप छोड़ी है। बघेलखण्ड में स्थित विभिन्न ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक पर्यटन स्थल यथा भरहुत, कामता, तेवर, देवताल, नागौद, अमरपाटन के प्राचीन मंदिर, मैहर का शारदा मंदिर, बांधवगढ़ के किले एवं गुफाचित्र, चित्रकूट की पावन भूमि, शिवपुरी के मकबरे और रीवा के राजमहल इस क्षेत्र की ऐतिहासिक गहराई को उजागर करते हैं। प्रस्तुत शोध पत्र में इन स्थलों की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, पुरातात्विक महत्व, सांस्कृतिक विशेषताओं एवं पर्यटन संभावनाओं का व्यवस्थित अध्ययन किया गया है। शोध में द्वितीयक स्रोतों ग्रंथों, शोध पत्रिकाओं, पुरातत्व सर्वेक्षण प्रतिवेदनों एवं राजकीय दस्तावेजों - का उपयोग किया गया है। निष्कर्षतः यह क्षेत्र न केवल ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, अपितु पर्यटन विकास की असीमित संभावनाओं को समेटे हुए है।

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Published

2026-03-24