कृष्णा सोबती का कथा-संसारः नारी चेतना और सामाजिक यथार्थ
DOI:
https://doi.org/10.64675/Keywords:
कृष्णा सोबती, नई कहानी आंदोलन, स्त्री चेतना, सामाजिक यथार्थ, नारी अस्मिता, विभाजन की पीड़ा, स्त्री-पुरुष संबंध, आत्मनिर्भरता, पारिवारिक विघटन, सामाजिक संरचना, स्त्री विमर्श ।Abstract
कृष्णा सोबती का कथा-संसार नारी चेतना, सामाजिक यथार्थ और स्त्री अस्मिता के जटिल प्रश्नों को उद्घाटित करता है। उनके कथा-साहित्य में स्त्री पात्रों की आत्मनिर्भरता, जुझारूपन और सामाजिक संघर्षों का यथार्थपरक चित्रण मिलता है। नई कहानी आंदोलन में महत्वपूर्ण स्थान रखने वाली सोबती जी ने अपने सीमित लेकिन सशक्त लेखन के माध्यम से नारी की सामाजिक, आर्थिक और मनोवैज्ञानिक स्थिति को अभिव्यक्त किया है। उनके कहानी संग्रह बादलों के घेरे तथा अन्य कहानियाँ विभाजन की पीड़ा, स्त्री-पुरुष संबंधों, परिवारिक विघटन, सामाजिक असमानता और स्त्री की स्वतंत्र पहचान के मुद्दों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करती हैं। उनकी कहानियाँ जैसे बादलों के घेरे, दादी अम्मा, भोले बादशाह, बहनें, बदली बरस गई, आदि, स्त्री की मानसिकता, भावनात्मक संघर्ष और सामाजिक बेड़ियों को तोड़ने की उनकी इच्छाशक्ति को सामने लाती हैं। सोबती की लेखनी स्त्री के आत्मसम्मान और अस्मिता की खोज पर केंद्रित रही है, जहाँ स्त्री सिर्फ एक सहनशील प्राणी न होकर स्वयं के अस्तित्व को स्थापित करने के लिए संघर्षरत दिखाई देती है।



